Thursday, 25 February 2016

अख़बार व् टीवी से मई वंचित रही
तो, पता नहीं चला कि
एक यूनिवर्सिटी में अफजल गुरु नामक आतंकी की बरसी मनाई गयी
ये तो, देशद्रोही को खुला समर्थन था
साथ ही, आँखें दिखने का बहाना कि
जो भी वे करेंगे उन्हें कोई रोक नही सकता
सीना ठोककर , देशद्रोह पर उतारू
ऐसे लोग जिन्हे देश से ज्यादा
उसपार वालों की परवाह
वे किसी आतंकी संगठन से मिले लगे
लगा उन्हें वंहा से फंडिंग मिल रही हो
सोसाइल साइट्स पर भी आँखें दिखा कर
पूरी ढीठता के साथ
अपने देशद्रोह के अजेंडे को
लागु करते हुए
वे छात्र संघ के रहनुमा
जिन्हे कुछ राष्ट्रीय पार्टियों की शाह व् समर्थन मिला हुआ है
ये है, एक देशद्रोही की याद में कल्पने वाले
और, संघ को दुत्कारने
हिन्दुओं को दुर्दुराने वाले
पाक-परास्त
सबके सब है
मस्त
और चाहते है करना
राष्ट्रवादियों को प सत 

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