Sunday, 28 February 2016

 आजकल,जाने कितने डॉ डर डरा कर रहते है मुझे घर के बाजू में एक माकन बन रहा है वंही
हमारे किचन का पानी जाता है, अब उसे बाजु वाले प्लाट से निकलना है
बात छोटी सी है, पर घर बनाते समय की गलती है जो मेरी सेहत को घुन जैसी लगी है वो
काम हो जायेगा , पर मैं  सोचती हूँ की जिस दिन ये काम होगा , मई बहुत खुश रहूंगी
 जिंदादिली यंहा आकर फिस्स हो गयी है
वरना खुद को बहुत खुशमिजाज बताती थी
बस इतनी ही मुझमें जिंदादिली थी, ये अब आ गया है
अपनी उदासी से दूसरों को भी परेशान करना, कोई अच्छी बात नही
माँ बेचारी  ,उसे भी फोन नही कर सकी
कभी इधर उधर भागते लगता है,
क्या ये सारे काम महत्व के है
इतना पता है, एक काम होगा तब दूसरा होगा
पहले ये सोचती थी , कि बेटे की शादी जुड़ेगी तो, बहुत हश रहूंगी
पर जो ये नया काम समने आया तो, मन वंही उलझ सा गया
बेटे का विवाह जुड़ने का आनंद भीतर ही दब गया
जो, भी हो एक ख़ुशी हो, और दूसरा काम भी सामने हो तो, कैसा अनुभव करते है
वंही आजकल, मेरे दिल के हालत है 

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