माँ पल पल छीन छीन
मृत्यु की प्रतीक्षा में
क्यूंकि अब पांव नही उठते
कमर के निचे का हिस्सा उठता नही
सभी को बहुत परेशानी
पर मृत्यु के देव
जबतक नही आते
आपको इस संसार में
सांसो का कर्ज
चुकाना होता है
माँ , तुमने कोई पाप नहीं किया
वो, महाकाल
जब उनकी सुधि हो
तब ले जाते है
तुम हो तो एक जोड़ी आँखें
हमें महत्वपूर्ण महसूस करती है
तुम चले जाओगी तो
वो , जगह हमेशा के लिए
खली हो जाएगी
मृत्यु की प्रतीक्षा में
क्यूंकि अब पांव नही उठते
कमर के निचे का हिस्सा उठता नही
सभी को बहुत परेशानी
पर मृत्यु के देव
जबतक नही आते
आपको इस संसार में
सांसो का कर्ज
चुकाना होता है
माँ , तुमने कोई पाप नहीं किया
वो, महाकाल
जब उनकी सुधि हो
तब ले जाते है
तुम हो तो एक जोड़ी आँखें
हमें महत्वपूर्ण महसूस करती है
तुम चले जाओगी तो
वो , जगह हमेशा के लिए
खली हो जाएगी
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