Tuesday, 29 October 2013

आज मेरा ये ग्रामीण क्षेत्र बहुत पिछड़ गया है 
गांव के मजदुर गंदी गलियां बकते है 
उन्हें रोकने वाला अब कोई नही है 
क्योंकि , अब २ दिन कि मजदूरी में म्हणे भर का राशन अत है 
बाकि से वे शराब पिटे है 
ये बेहद गंदी बात है 
किन्तु राजनीती ने देश को वंहा पहुंचा दिया है 
जंहा , देश में मेहनती व् ईमानदार शखस ही म्हणत करके कमाता है 
बाकि सरकारी खैरात कि खाते व् मौज उड़ाते है 
कोई भी कम करने वाले को हेलू समझते है 

Sunday, 20 October 2013

tum angan ki chiriya

तुम खुश रहोगी तुम भी किसी आंगन में 
फूल बनकर खिलोगी 
तुम भी एक दिन खुशियों से मिलोगी 
मेरी जान, मत होना उदाश 
क्योंकि, तुम्हारे दामन में भी है 
खुशियों के कुछ पल 
क्योंकि, उपर वाला 
सभी के लिए 
बनता है, खुशियों का संसार 

Saturday, 19 October 2013

tum khush rahna

हाँ तुम खुश होना 
मई तुम्हारे लिए 
रोज कविता लिखूंगी