Friday, 31 July 2015

माँ से कल बातें हुई 
वो, आवाज भी अब ठीक नही आती 
वो, कह रही थी की आचार खाना है 
कल, उसके लिए वंही भेज रही 
माँ , तुम हमारे लिए 
क्या क्या बनाती थी 
पर्वों में बहुत याद आती है 
माँ , तुम्हे याद करते ,
आज भोर में उठते ही 
छत पर गयी थी