Wednesday, 28 January 2015
Tuesday, 27 January 2015
Saturday, 24 January 2015
Thursday, 15 January 2015
Tuesday, 13 January 2015
Monday, 12 January 2015
Sunday, 11 January 2015
Saturday, 10 January 2015
आँगन को
आँगन को
पाठकों का इतना प्यार मिला है
की इसने , बनारस की बयार को पीछे छोड़ दिया है
वो, महिला जो,
सड़कों पर घूमती हुयी
भीख मांगती है
अपने बूढ़े हाथों में झोली टांगे
शहर के मोहल्ले भटकती है
उसे हे राम कहते सुना है
और वो , मंदिर के बाहर भी बैठी थी
कि उसका कोई घर नही है
वो , ऐसे ही पीले रंग की साड़ी पहने होती है
जाने किस गांव से लौटी है
इस शहर में अपने वजूद को बचाने
जन्हा, उसका अपना कोई नहीं है
यदि है, तो बीएस ,
उसके जैसे दूसरे भीख मांगने वाले
जिनके पास कोई वोटर कार्ड नही है
इश्लीए, वो, भूखे नंगे अपना वजूद बचाने घूम रहे है उधजर वो, है
उधर वो, है
जो, सरकार से अरबों का कर्ज लेकर भी
सरकारों से माफ़ी की भीख मांग रहे है
कितनी, असमानता है
हमारे सभ्य देशों में
आँगन को
पाठकों का इतना प्यार मिला है
की इसने , बनारस की बयार को पीछे छोड़ दिया है
वो, महिला जो,
सड़कों पर घूमती हुयी
भीख मांगती है
अपने बूढ़े हाथों में झोली टांगे
शहर के मोहल्ले भटकती है
उसे हे राम कहते सुना है
और वो , मंदिर के बाहर भी बैठी थी
कि उसका कोई घर नही है
वो , ऐसे ही पीले रंग की साड़ी पहने होती है
जाने किस गांव से लौटी है
इस शहर में अपने वजूद को बचाने
जन्हा, उसका अपना कोई नहीं है
यदि है, तो बीएस ,
उसके जैसे दूसरे भीख मांगने वाले
जिनके पास कोई वोटर कार्ड नही है
इश्लीए, वो, भूखे नंगे अपना वजूद बचाने घूम रहे है उधजर वो, है
उधर वो, है
जो, सरकार से अरबों का कर्ज लेकर भी
सरकारों से माफ़ी की भीख मांग रहे है
कितनी, असमानता है
हमारे सभ्य देशों में
Wednesday, 7 January 2015
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