Tuesday, 27 January 2015

Haath aaya hai jabse tera haath mein

नही
नही पता 
ये जिंदगी 
बैनगंगा से 
गंगा जी तक 
कैसे चली गयी 
कितने लोग मिलते रहे 
बिछुरते रहे 
और मई सभी को सपनों की तरह 
संजोती रही 
ये भी नही समझा 
की, सब क्यों मिल जाते है बस 
इतना जानती हूँ 
कि मई कुछ खास हूँ 
जन्हा सभी मुझे मिलते है 
और अनायास मुझे सबका स्नेह भी मिलता है 

Saturday, 24 January 2015

सभी
सभी आँगन को पसंद करते है 
कोई भी जैसे बनारस की बयार को नही चाहता 
किन्तु मुझे बहुत पसंद है बनारस की बयार लिखना 

Thursday, 15 January 2015

Mahendra & Asha Tumhara Chahne Wala - Kahin Din Kahin Raat 1968]

Makhna - Bade Miyan Chote Miyan 1998

आज गांव  गयी थी 
माँ ने मुझे देखकर , भजन गाने शुरू  दिए 
पर, मई बैठ भी नही सकी 
 भतीजियों ने मुझे बछड़ा दिखने ले गयी 
और मैंने , उसके फोटो लिए 
बीएस, इतना सा रहा 
गांव का सफर 

Saturday, 10 January 2015

aaj kal yaad kuch aur rehta nahin

आँगन को
आँगन को 
पाठकों का इतना प्यार मिला है 
की इसने , बनारस की बयार को पीछे छोड़ दिया है 
वो, महिला जो,
सड़कों पर घूमती हुयी 
भीख मांगती है 
अपने बूढ़े हाथों में झोली टांगे 
शहर के मोहल्ले भटकती है 
उसे हे राम कहते सुना है 
और वो , मंदिर के बाहर भी बैठी थी 
कि उसका कोई घर नही है 
वो , ऐसे ही पीले रंग की साड़ी पहने होती है 
जाने किस गांव से लौटी है 
इस शहर में अपने वजूद को बचाने 
जन्हा, उसका अपना कोई नहीं है 
यदि है, तो बीएस ,
उसके जैसे दूसरे भीख मांगने वाले 
जिनके पास कोई वोटर कार्ड नही है 
इश्लीए, वो, भूखे नंगे अपना वजूद बचाने घूम रहे है उधजर वो, है 
उधर वो, है 
जो, सरकार से अरबों का कर्ज लेकर भी 
सरकारों से माफ़ी की भीख मांग रहे है 
कितनी, असमानता है 
हमारे सभ्य देशों में