माँ
माँ कितने भजन जानती व् गाती है
अद्भुत है, उसका ज्ञान,
कबीर के वो भजन तो, आज के शोध-छात्र भी नही जानते जो माँ
गाती है माने
माँ ने कल, अचानक गाना शुरू किया
मन मस्त हुआ फिर क्या बोले
माँ से मैंने पुछि
माँ , वो मराठी की कविता सुना न
जो, कोयल पर है
माँ ने कुछ गए कर कही मैंने ऐसे लिखी
श्लोक --येथे , समस्त बहरे बसतात , का भासने कोकिल वर्ण बहूनि ..........
माँ ने इस श्लोक का अर्थ भी बताई, जो मैंने लिखी
हे कोकिला , तू इतनी मीठी आवाज में क्यों गाती है , यंहा तो ,
सभी बहरे बसते है , तो, तेरे काले रंग पर हँसते है , वो , तेरी
मीठी आवाज को क्या जानेंगे ,. ये कोकिला इतनी मधुर आवाज कहूँ काढ़ते ,
ये तुला काला रंग पाहून कौआ मानते
मेरी अल्प-शिक्षित संस्कृत-हिंदी व् मराठी में जो भावार्थ कहकर सुनाया, तब मई
चकित रह गयी, की माँ कितनी तेज है , काव्य कहने व् गीत गाने में। …
माँ ने बताई , उसके पिता अर्थात मेरे नाना घर में हमेशा जब भी पंगत करते, पंगत
बैठने पर माँ को बुलाते, जो, ७ या ८ बरस की थी, और वो, ये श्लोक भावार्थ सहित कहती थी ये
ये मराठी की बहुत ही प्यारी कविता भी है
माँ कितने भजन जानती व् गाती है
अद्भुत है, उसका ज्ञान,
कबीर के वो भजन तो, आज के शोध-छात्र भी नही जानते जो माँ
गाती है माने
माँ ने कल, अचानक गाना शुरू किया
मन मस्त हुआ फिर क्या बोले
माँ से मैंने पुछि
माँ , वो मराठी की कविता सुना न
जो, कोयल पर है
माँ ने कुछ गए कर कही मैंने ऐसे लिखी
श्लोक --येथे , समस्त बहरे बसतात , का भासने कोकिल वर्ण बहूनि ..........
माँ ने इस श्लोक का अर्थ भी बताई, जो मैंने लिखी
हे कोकिला , तू इतनी मीठी आवाज में क्यों गाती है , यंहा तो ,
सभी बहरे बसते है , तो, तेरे काले रंग पर हँसते है , वो , तेरी
मीठी आवाज को क्या जानेंगे ,. ये कोकिला इतनी मधुर आवाज कहूँ काढ़ते ,
ये तुला काला रंग पाहून कौआ मानते
मेरी अल्प-शिक्षित संस्कृत-हिंदी व् मराठी में जो भावार्थ कहकर सुनाया, तब मई
चकित रह गयी, की माँ कितनी तेज है , काव्य कहने व् गीत गाने में। …
माँ ने बताई , उसके पिता अर्थात मेरे नाना घर में हमेशा जब भी पंगत करते, पंगत
बैठने पर माँ को बुलाते, जो, ७ या ८ बरस की थी, और वो, ये श्लोक भावार्थ सहित कहती थी ये
ये मराठी की बहुत ही प्यारी कविता भी है
No comments:
Post a Comment