मेरे
मेरे प्यारे आँगन
नही पता क्यों
तुम इतने ज्यादा पढ़े जाते हो जबकि,
मई तुम्हे नही लिखती ज्यादा न, ही तुम्हारा
प्रचार ही करती हूँ तुम, फिर भी
बनारस की बयार से
आगे चलते हो क्या कहु
तुम्हारी इस पससंद
पसंद व् प्रोग्रेस पर
मेरे प्यारे आँगन
नही पता क्यों
तुम इतने ज्यादा पढ़े जाते हो जबकि,
मई तुम्हे नही लिखती ज्यादा न, ही तुम्हारा
प्रचार ही करती हूँ तुम, फिर भी
बनारस की बयार से
आगे चलते हो क्या कहु
तुम्हारी इस पससंद
पसंद व् प्रोग्रेस पर
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