गाँव अब ज्यादा याद नही आता
मन नही करता कोई लम्बी कविता लिखने का
ऐसा लगता है,
बहुत दूर निकल आयी हूँ
बहुत कुछ भीतर ही भीतर उमड़ता ढूंढ़ता है
किन्तु, उसे शब्द का रूप नही दे सकती
मन अब कंही और है मेरा
मन नही करता कोई लम्बी कविता लिखने का
ऐसा लगता है,
बहुत दूर निकल आयी हूँ
बहुत कुछ भीतर ही भीतर उमड़ता ढूंढ़ता है
किन्तु, उसे शब्द का रूप नही दे सकती
मन अब कंही और है मेरा
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