बुआ जी
आज आपकी बहुत याद आती है
मई उस गांव तक गयी थी
जन्हा से बचपन में मई
आपके साथ , बैलगाड़ी में जाती थी जब, मई छोटी सी थी
तभी से उन राहों से आपके संग जाती थी
और , मुझे वो मंदिर बहुत बड़ा लगता था
वंहा श्रद्धालुओं की पंक्ति खड़े होकर
प्रार्थना करती थी
अब वो सब नही है
बहुत वक़्त गुजर चूका है
बुआ जी, आप बहुत दूर चली गयी हो
सिर्फ आपकी यादें है
वे रस्ते , अब वंहा नही जाउंगी
मुझे अपने बेटे का जीवन संवरना है इश्लीए
सब भुला के
नई खुशियों को आमंत्रित करना चाहती हूँ
बुआ जी आप भी मेरे घर में खुशियों को सहेजते देखना चाहती हो
आपका आशीर्वाद व् दुआएं मेरे साथ है
मई, जरूर सफल होउंगी
इश्लीए, मैंने,
वंहा मंदिर में अपने बचपन के साथी
कृष्ण से प्रार्थना की है
आज आपकी बहुत याद आती है
मई उस गांव तक गयी थी
जन्हा से बचपन में मई
आपके साथ , बैलगाड़ी में जाती थी जब, मई छोटी सी थी
तभी से उन राहों से आपके संग जाती थी
और , मुझे वो मंदिर बहुत बड़ा लगता था
वंहा श्रद्धालुओं की पंक्ति खड़े होकर
प्रार्थना करती थी
अब वो सब नही है
बहुत वक़्त गुजर चूका है
बुआ जी, आप बहुत दूर चली गयी हो
सिर्फ आपकी यादें है
वे रस्ते , अब वंहा नही जाउंगी
मुझे अपने बेटे का जीवन संवरना है इश्लीए
सब भुला के
नई खुशियों को आमंत्रित करना चाहती हूँ
बुआ जी आप भी मेरे घर में खुशियों को सहेजते देखना चाहती हो
आपका आशीर्वाद व् दुआएं मेरे साथ है
मई, जरूर सफल होउंगी
इश्लीए, मैंने,
वंहा मंदिर में अपने बचपन के साथी
कृष्ण से प्रार्थना की है