माँ जो एक कपडे में लिपटी
घबराहट से मल-मूत्र का वेग नही रुकता
और, हम सब पहुंचे
तो, मेरी छोटी बहन को देखकर रोने लगी
दोनों रो रही थी
माँ बोल रही थी, रोते हुए
क्या गति हो गयी बाई , मेरी
माँ कैसे सहन करती है
मेरी बड़ी बुआ के अंतिम दिनों में
वो, पलंग पर रहती थी पांव टूट गया था
सब कुछ बहुत मुश्किल हो गया था
बाथरूम-टॉयलेट की परेशानी बहु-बेटियों ने ही सब किया
गाँवों में आया या नर्स नही मिलती
अंतिम सफर के पहले सभी सफर करते है
माँ तुम अंतिम यात्रा पर निकलो
इन्ही सब चाहते है क्यूंकि
कोई तुम्हारी मदद नही कर पता
तुम भी कितनी सुख सी गयी हो हाथ जैसे
लकड़ी के हो, नाड़ियाँ दिखती है
माँ
घबराहट से मल-मूत्र का वेग नही रुकता
और, हम सब पहुंचे
तो, मेरी छोटी बहन को देखकर रोने लगी
दोनों रो रही थी
माँ बोल रही थी, रोते हुए
क्या गति हो गयी बाई , मेरी
माँ कैसे सहन करती है
मेरी बड़ी बुआ के अंतिम दिनों में
वो, पलंग पर रहती थी पांव टूट गया था
सब कुछ बहुत मुश्किल हो गया था
बाथरूम-टॉयलेट की परेशानी बहु-बेटियों ने ही सब किया
गाँवों में आया या नर्स नही मिलती
अंतिम सफर के पहले सभी सफर करते है
माँ तुम अंतिम यात्रा पर निकलो
इन्ही सब चाहते है क्यूंकि
कोई तुम्हारी मदद नही कर पता
तुम भी कितनी सुख सी गयी हो हाथ जैसे
लकड़ी के हो, नाड़ियाँ दिखती है
माँ
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