माँ की शक्ति चूक गयी है
वो अपने आप से कुछ भी नही कर पा रही है
उसमें ताकत नही रही
बहुत दिनों से रो रही थी
और, उसे शक्ति का भोजन न देकर इंजेक्शन लगा रहे थे
ये बहुत नुकसान दायक होता है
इससे कमजोरी आती है
मौत भी हो सकती है
उसे मैंने चने का सूप देने कही थी
पर वे लोग बिलुल नही सुनते थे अब माँ मौत के मुहाने पर है
वो असमय मौत के पास है यदि उसे एक कप दूध और चने का सूप देते तो, उसे तत्काल एनर्जी मिलती
पर वे उसे समझते थे
मेडिसिन भी इस अवस्था में बेकार साबित हो गयी
माँ बचाई जा सकती थी वे उसे बिलकुल नही सुनते थे
और कहते थे, की ये वो कहती है
जबकि, माँ को जो दिया जाये वंही वो खा सकती है
माँ की असामयिक कमजोरी और दुर्दशा के लिए वे लोग जिम्मेदार है
उन्होंने उसकी समस्या नही सुनी वे लोग उसे चिल्लाती छोड़कर
उसके कक्ष से गुजरते थे वो, रातदिन रोटी थी यदि
मई कोई सलाह नही सुनते थे और
कहते थे , कुछ हो गया तो, हम नही करेंगे
उन्होंने इसे साबित करके दिखाया
माँ उठ नही पाती थी,
कलपती रहती थी
पर वे नही सुनरही थे
माँ अपने छोटे बेटे से मोरल सुपोर्ट मांगती रही वो
छटपटाती थी, की बीटा उसे देखेगा
वे लोग नही सुन सके क्यूंकि
उन्होंने कह रखा था, की
कुछ हो गया तो हम नही करेंगे
जब माँ अपनी बीमारी व् कमजोरी में रातदिन रो रही थी
तब, छोटा भाई गांव चले गया
वंहा वक़्त गुजरता रहा
और बड़ा बीटा अपनी बीबी के साथ अपने बेटे के पास चले गया
माँ के तड़पने या रोने का कोई असर नही हुआ
वे लोग अपने करते कर्तव्य निभा चुके थे
वे पहले सेवा कर चुके थे
माँ का रोने , जीने मरने से असम्प्रक्त बेटे
अब दीदी वंहा जाकर माँ को उठा बैठा रही है
दीदी जो सबके दुःख में सहभागी होती है
उसके बच्चे नही है पर
हृदय में दया है
वो अपने आप से कुछ भी नही कर पा रही है
उसमें ताकत नही रही
बहुत दिनों से रो रही थी
और, उसे शक्ति का भोजन न देकर इंजेक्शन लगा रहे थे
ये बहुत नुकसान दायक होता है
इससे कमजोरी आती है
मौत भी हो सकती है
उसे मैंने चने का सूप देने कही थी
पर वे लोग बिलुल नही सुनते थे अब माँ मौत के मुहाने पर है
वो असमय मौत के पास है यदि उसे एक कप दूध और चने का सूप देते तो, उसे तत्काल एनर्जी मिलती
पर वे उसे समझते थे
मेडिसिन भी इस अवस्था में बेकार साबित हो गयी
माँ बचाई जा सकती थी वे उसे बिलकुल नही सुनते थे
और कहते थे, की ये वो कहती है
जबकि, माँ को जो दिया जाये वंही वो खा सकती है
माँ की असामयिक कमजोरी और दुर्दशा के लिए वे लोग जिम्मेदार है
उन्होंने उसकी समस्या नही सुनी वे लोग उसे चिल्लाती छोड़कर
उसके कक्ष से गुजरते थे वो, रातदिन रोटी थी यदि
मई कोई सलाह नही सुनते थे और
कहते थे , कुछ हो गया तो, हम नही करेंगे
उन्होंने इसे साबित करके दिखाया
माँ उठ नही पाती थी,
कलपती रहती थी
पर वे नही सुनरही थे
माँ अपने छोटे बेटे से मोरल सुपोर्ट मांगती रही वो
छटपटाती थी, की बीटा उसे देखेगा
वे लोग नही सुन सके क्यूंकि
उन्होंने कह रखा था, की
कुछ हो गया तो हम नही करेंगे
जब माँ अपनी बीमारी व् कमजोरी में रातदिन रो रही थी
तब, छोटा भाई गांव चले गया
वंहा वक़्त गुजरता रहा
और बड़ा बीटा अपनी बीबी के साथ अपने बेटे के पास चले गया
माँ के तड़पने या रोने का कोई असर नही हुआ
वे लोग अपने करते कर्तव्य निभा चुके थे
वे पहले सेवा कर चुके थे
माँ का रोने , जीने मरने से असम्प्रक्त बेटे
अब दीदी वंहा जाकर माँ को उठा बैठा रही है
दीदी जो सबके दुःख में सहभागी होती है
उसके बच्चे नही है पर
हृदय में दया है
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