Wednesday, 18 September 2013

jb dekhi maa ko

जब माँ को गाँव जाकर देखी , तो लगा, की माँ कितनी महँ है
माँ महँ है , माहान है , महान है
माँ जिस हालत में जी रही है
वो, असं नही है
उसे होली के दिन से कमर में फ्रैक्चर है
ओप्रसोन नही हो सकता
वो, दर्द से जैसे तदपि है,
तड़पी है
हम एक पल को तडपते तो जान निकल जाती
उसे किसी ने नही दिया , इओदेक्ष या फ़ास्ट रिलीफ
मई परसों, उसके पास पैसे से , उसको ये दवाएं ले आई
अब, वो बेचारी किसी तरह से तकलीफ से मुक्त हो रही
कोई, उसे वोलिनी लेकर नही लाया
वो तडपती रही
माँ तुम कितनी महँ हो 

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