उदाश होती हूँ
जब, निराश हो जाती हूँ
तो, माँ को याद कर लेती हूँ
माँ की वो मूरत यद् अति है
घर के बिच के कक्ष में बैठी
वो, आँखें बंद किये प्रभु को भजति है
माँ तुम कितनी महान हो
मई तो , जरा सी बात में मरने की सोचती हूँ
जब, निराश हो जाती हूँ
तो, माँ को याद कर लेती हूँ
माँ की वो मूरत यद् अति है
घर के बिच के कक्ष में बैठी
वो, आँखें बंद किये प्रभु को भजति है
माँ तुम कितनी महान हो
मई तो , जरा सी बात में मरने की सोचती हूँ
No comments:
Post a Comment