आज आलोक श्रीवास्तव कि कविता पढ़ी
बाबूजी बहुत याद आये
बाबूजी हमेशा कोइना कोई काम करते ही रहते है
उनके होने से जैसे घर में सहन में
शीतल छाँव का अहसास होता है
जैसे कि, हम किसी
घने छायादार दरख्त के साये में हो
बाबूजी बहुत याद आये
बाबूजी हमेशा कोइना कोई काम करते ही रहते है
उनके होने से जैसे घर में सहन में
शीतल छाँव का अहसास होता है
जैसे कि, हम किसी
घने छायादार दरख्त के साये में हो
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