Friday, 29 August 2014

माँ से
माँ से आजकल हो पाती 
कभी माँ कुछ देरके लिए, घरसे बहार रहती तो 
हमसब उसे की कमी महसूस करते थे,
किन्तु अब माँ से बात करने समय नही निकलते 
बाबूजी , बाथरूम में फिसल गए 
वृद्धावस्था , की जो 
 वो, सभी को आणि है 
फिर भी अपने इतने प्रिय करुणा मई माँ व् पिता को देखने 
हम जा नही पाते 
उनका कर्ज कभी नही चूका सकते 

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