माँ
माँ बाबू जी का वो घर पुराण व् जर्जर हो चूका है
उस घर की दीवारें आसपास से ढहने लगी है
वंहा आये दिन सांप निकलते है
सभी चाहते है,
नया मकान बन जाये
किन्तु क्या इतना आसान है
पुराने से मुक्ति पाना
और नया बना लेना
हमारे दिल में जो जगह होती है पुराने के लिए
हम उसे एक दिन में नही बदल पाते
माँ बाबू जी का वो घर पुराण व् जर्जर हो चूका है
उस घर की दीवारें आसपास से ढहने लगी है
वंहा आये दिन सांप निकलते है
सभी चाहते है,
नया मकान बन जाये
किन्तु क्या इतना आसान है
पुराने से मुक्ति पाना
और नया बना लेना
हमारे दिल में जो जगह होती है पुराने के लिए
हम उसे एक दिन में नही बदल पाते
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