Thursday, 11 September 2014

ये जिंदगी
ये जिंदगी उधर में नही मिलती 
हम जो कल थे, 
वो, आज नही है 
हम खुद को मेन्टेन तब करेंगे 
जब हमारी जेब में पैसा हो 
हम कल, क्या होंगे एक अनिश्चितता रहती है प्रति पल वो डरती है 
तभी हम ईश्वर की  जाते है 
और मांगते है की 
म्हे सलामत रखे, उपरवाला 
हमारे स्वप्न, हमारे आभाष 
हमारे  गुजरते है साथ व् साथी भी 
हालत के अनुसार बदलते है 
हम जब फर्ज निभाते है 
तभी दूसरे हमारे उप्र ज्यादा तोहमत  लगते है 

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