जब भी माँ से फोन पर बातें होती है
माँ किसी खाने की इक्षा प्रकट करती है
ये बताती है , की उससे घर में कोई बात तक नही करता
तो,अच्छा नही लगता
माँ ने तो सबके लिए सब कुछ किया
जब उसने सब बच्चों के लिए
सबका लालन पालन लड़ पीयर प्यार थी
आज उसकी जो
टीआरएस आता है है
७ बच्चों की माँ को बोलने तरसना पड़ता है
माँ तुम्हारे पास जा भी
मई कंही से भी स्वंत्र नही हु
तुम जब बीमार नही थी
हमारे घर तक आ भी जाती थी
जबसे परबस हुई हो ही पड़े रहना
है
फिर तुम्हे भजन गेट देखने का मन होता है
मन होता है, की
तुम्हे तुम्हारे पसंद का पकाकर खिलाऊ
माँ किसी खाने की इक्षा प्रकट करती है
ये बताती है , की उससे घर में कोई बात तक नही करता
तो,अच्छा नही लगता
माँ ने तो सबके लिए सब कुछ किया
जब उसने सब बच्चों के लिए
सबका लालन पालन लड़ पीयर प्यार थी
आज उसकी जो
टीआरएस आता है है
७ बच्चों की माँ को बोलने तरसना पड़ता है
माँ तुम्हारे पास जा भी
मई कंही से भी स्वंत्र नही हु
तुम जब बीमार नही थी
हमारे घर तक आ भी जाती थी
जबसे परबस हुई हो ही पड़े रहना
है
फिर तुम्हे भजन गेट देखने का मन होता है
मन होता है, की
तुम्हे तुम्हारे पसंद का पकाकर खिलाऊ
No comments:
Post a Comment