बुआजी के घर की दिवाली क्या खास होती थी वो, ख़ुशी
आज कहा , फिर भी हमारे साथ बच्चेहो
इन्ही हमारी ख़ुशी है वो, वक़्त
आज भी यादों में
मीठे की तरह घुलता जाता है
आज कहा , फिर भी हमारे साथ बच्चेहो
इन्ही हमारी ख़ुशी है वो, वक़्त
आज भी यादों में
मीठे की तरह घुलता जाता है
chahti hu, firse likhu
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