Friday, 18 December 2015

खेल मेरे थे जो प्यारे 
जिंदगी के थे , जो सहारे 
छूटे जन्हा थे किनारे 
अब हम किसको पुकारे 
हुए बेसहारे 
प्रभु तुम ही तारे 
धरती से पहुंचे 
तो, बनके तारे 
वंही रहेंगे तुम जब हम देखा करेंगे 
माघ की ठिठुरती रातों में 
वे साथ जाने कहा गए 
दीदी का फ़ोन आया की 
भोला , मेरा छोटा ममेरा भाई नही रहा 
उसकी बाईपास सर्जरी हुई थी बहुत रोता था बहुत 
तकलीफ होती थिचाले गया हमारे मां जी भी ऐसे ही अचानक चले गए थे 
कहा. चले जाते है, हाड़मांस के पिजर 
ये सब, उड़के किश देश चले जाते है नही पता ढूंढा करेंगे आसमान के तारों में 
जादू की निर्जन रातों में 

No comments:

Post a Comment