Thursday, 10 March 2016

माँ जो एक कपडे में लिपटी 
घबराहट से मल-मूत्र का वेग नही रुकता 
और, हम सब पहुंचे 
तो, मेरी छोटी बहन को देखकर रोने लगी 
दोनों रो रही थी 
माँ बोल रही थी, रोते  हुए 
क्या गति हो गयी बाई , मेरी 
माँ कैसे सहन करती है 
मेरी बड़ी बुआ के अंतिम दिनों में 
वो, पलंग पर रहती थी पांव टूट गया था 
सब कुछ बहुत मुश्किल हो गया था 
बाथरूम-टॉयलेट की परेशानी बहु-बेटियों ने ही सब किया 
गाँवों में आया या नर्स नही मिलती 
अंतिम सफर के पहले सभी सफर करते है 
माँ तुम अंतिम यात्रा पर निकलो 
इन्ही सब चाहते है क्यूंकि 
कोई तुम्हारी मदद नही कर पता 
तुम भी कितनी सुख सी गयी हो हाथ जैसे 
लकड़ी के हो, नाड़ियाँ दिखती है 
माँ 

"Ho ke majboor mujhe usne bhulaya hoga"- HAQEEAT

Tuesday, 8 March 2016

aangan: वे लोग खुलकर खेल रहे है खुले आमदेश के साथ खिलवाड़ ...

aangan: वे लोग खुलकर खेल रहे है खुले आम
देश के साथ खिलवाड़ ...
: वे लोग खुलकर खेल रहे है खुले आम देश के साथ खिलवाड़ कर रहे है वे देशभक्तो संग मसखरी कर रहे है देश के जवानों पर घिनौने बयान दे रहे है वे अ...
वे लोग खुलकर खेल रहे है खुले आम
देश के साथ खिलवाड़ कर रहे है वे
देशभक्तो संग मसखरी कर रहे है
देश के जवानों पर घिनौने बयान दे रहे है
वे अपनी लोकप्रियता के लिए
और संघ को चिड़ाने
जो मन में आता है
बक देते है देश के बड़े विपक्षी नेताओं की उन्हें
सह मिली हुई है
कश्मीर पर भारत का नाजायज हक़ बताने वाले
देश के कैसे नागरिक है वे
पाक एजेंसी के हाथों खेल रहे है
इन्हे कान्हा से फण्ड मिला है
इसकी जाँच होनी ही चाहिए 
तिल तिल तिल की मौत की प्रतीक्षा करना
और मरणा 

Monday, 7 March 2016

aangan: माँ पल पल छीन छीन मृत्यु की प्रतीक्षा में क्यूंक...

aangan: माँ पल पल छीन छीन 
मृत्यु की प्रतीक्षा में 
क्यूंक...
: माँ पल पल छीन छीन  मृत्यु की प्रतीक्षा में  क्यूंकि अब पांव नही उठते  कमर के निचे का हिस्सा उठता नही  सभी को बहुत परेशानी  पर मृत्यु क...
माँ पल पल छीन छीन 
मृत्यु की प्रतीक्षा में 
क्यूंकि अब पांव नही उठते 
कमर के निचे का हिस्सा उठता नही 
सभी को बहुत परेशानी 
पर मृत्यु के देव 
जबतक नही आते 
आपको इस संसार में 
सांसो का कर्ज 
चुकाना होता है 
माँ , तुमने कोई पाप नहीं किया 
वो, महाकाल 
जब उनकी सुधि हो 
तब ले जाते है 
तुम हो तो एक जोड़ी आँखें 
हमें महत्वपूर्ण महसूस करती है 
तुम चले जाओगी तो 
वो , जगह हमेशा के लिए 
खली हो जाएगी 

Friday, 4 March 2016

सब उसे हे राम के नाम से जानते है
वो, एक वृद्धा स्त्री भीख मांगती थी
मांगती है पहले एक युवा लड़की उसे सहारा देती थी किन्तु
अब वह वृद्धा अकेले मांगती है और
शहर से गुजरते वक़्त हे राम जरूर कहती है इसलिए
सब उसे हे राम के नाम से जानते है
ये सही है, की हमारे क्षेत्र के मंत्री की आय अब २००० करोड़ हो चुकी है पर
वह किसी की मदद नही करता
और जिन्हे सरकारी मदद देता है
उन्हें वह बहुत प्रचारित करता है यंहा की जो भी योजना होती है
उसमे से वो अपना हिस्सा  लेता है सब जानते है, कि उसने इतना बड़ा साम्राज्य
कैसे भ्रस्टाचार से माया है उसकी जाती वाले
बहुत भ्रस्टाचार करते है
पर कोई पकड़ा नही जाता 

Thursday, 3 March 2016

 माँ की शक्ति चूक गयी है
वो अपने आप से कुछ भी नही कर पा रही है
उसमें ताकत नही रही
बहुत दिनों से रो रही थी
और, उसे शक्ति का भोजन न देकर इंजेक्शन लगा रहे थे
ये बहुत नुकसान दायक होता है
इससे कमजोरी आती है
मौत भी हो सकती है
उसे मैंने चने का सूप देने कही थी
पर वे लोग बिलुल नही सुनते थे अब माँ मौत के मुहाने पर है
वो असमय मौत के पास है यदि उसे एक कप दूध और चने का सूप देते तो, उसे तत्काल एनर्जी मिलती
पर वे उसे  समझते थे
मेडिसिन भी इस अवस्था में बेकार साबित हो गयी
माँ बचाई जा सकती थी वे उसे बिलकुल नही सुनते थे
और कहते थे, की ये वो कहती है
जबकि, माँ को जो दिया जाये वंही वो खा सकती है
माँ की असामयिक कमजोरी और दुर्दशा के लिए वे लोग जिम्मेदार है
उन्होंने उसकी समस्या नही सुनी वे लोग उसे चिल्लाती छोड़कर
उसके कक्ष से गुजरते थे वो, रातदिन रोटी थी यदि
मई कोई सलाह  नही सुनते थे और
कहते थे , कुछ हो गया तो, हम नही करेंगे
उन्होंने इसे साबित करके दिखाया
माँ उठ नही पाती थी,
कलपती रहती थी
पर वे नही सुनरही थे
माँ अपने छोटे बेटे से मोरल सुपोर्ट मांगती रही वो
छटपटाती थी, की बीटा उसे देखेगा
वे लोग नही सुन सके क्यूंकि
उन्होंने कह रखा था, की
कुछ हो गया तो हम नही करेंगे
जब माँ अपनी बीमारी व् कमजोरी में रातदिन रो रही थी
तब, छोटा भाई गांव चले गया
वंहा वक़्त गुजरता रहा
और बड़ा बीटा अपनी बीबी के साथ अपने बेटे के पास चले गया
माँ के तड़पने या रोने का कोई असर नही हुआ
वे लोग अपने करते कर्तव्य निभा चुके थे
वे पहले सेवा कर चुके थे
माँ का रोने , जीने मरने से असम्प्रक्त  बेटे
अब दीदी वंहा जाकर माँ को उठा बैठा रही है
दीदी जो सबके दुःख में सहभागी होती है
उसके बच्चे नही है पर
हृदय में दया है 

Tuesday, 1 March 2016

एक भय जो दिल में छिपा हो
आप हमेशा डरे से रहे
अपना हाल किसीसे न कहे
मन ही मन में जज्ब करते हो
ये डर मन से निकल दो
ये मन जो डरकर जीता है उस भय से जितना है क्यों
जबकि सबकुछ मेरे अनुसार है मुझे
इस दर को जितना है प्रार्थना करनी है मन को
समझना है
ऐसा कुछ नही ,जो हो
हालत मेरे अनुकूल है
अनुकूल रहेंगे
सबका सहयोग मिलेगा
बस , ये डर मनसे निकल दो
भय मनमें पनाह चाहे
तो , उसे पास न फटकने दो