Tuesday, 27 August 2013

ho rahi hai, bhadon ki barish

आज जब भादो माह की सप्तमी में अचानक ही , झमाझम बारिश होने लगी है , मुझे बुआ जी के घर में बिताये , वो दिन याद  आ रहे है , जब लगता था, की जिंदगी बस यंही है , सोच भी नही सकती  थी, की कभी वंहा से जाना होगा।  बुआ जी के उस बड़े से घर में बारिश का संगीत गूंजा करता था।  ओर्नियोन के छप्परों से गिरते पानी का संगीत मन में समा जाता था।  व् स्कूल जाते हुए वो दिन बहुत प्यार से गुजरते थे।  मेरी सहेली ममता के साथ स्कूल से लौट क्र, हम दोनों अपने खेल में खो जाते थे।  वो गाँव की , क्या करूं, तेरा 

No comments:

Post a Comment