पता है ,उस दिन के बाद ममता से मेरी कट्टी थी ,ममता मुझे मारने की धमकी देती , और मै उससे डर कर , उसके घर के सामने से लुकते - छिपते जाती थी , स्कूल। ऐसे ही माह निकल गया था , तभी रक्षा-बंधन आया , उसके दुसरे दिन, भुजरिया थी, बस साँझ के समय मै बुआजी के साथ , सामने सबसे सबसे भुजलिया लेने बैठी थी , कि ममता अपने भैया के संग आयी , बुआजी के साथ मुझे भी भुजली देकर नमस्ते की, और हमारी पहली व् आखिरी लड़ाई का अंत हो गया , फिर हम कभी नही झगडे , लड़ाई का कोई था। हम अच्छी सहेलियां थी , की जबतक मै बुआ के गाँव से लौट नही गयी , हम साथ साथ ही रहे। किन्तु जब मै अकस्मात वंहा से आ गयी, तो बुआ के साथ ही, ममता पर भी बहुत बुरी बीती , ये बेहद बहुत नाजुक घड़ी थी , मेरा बुआ के घर से लौटना , क्यों हुआ , ये अगले अंक मे…।
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