Sunday, 30 March 2014

बचपन तितलियों कि तरह 
तेह उड़ता है 
तीव्रता से बिट जाता है 
भागता समय 
जैसे कुछ हाथ नही आता है 
उन अमराईयों 
उन छावों का 
स्मृति-शेष हो जाना 
जंहा , एक जीवन बिता 
जो, लगता था कि कभी नही बीतेगा 
उन छाँवों का गुजर जाना 
और फिर 
वंहा का 
कोई साया भी 
साथ ना होना 
लड़कियां 
हमेशा रहती है 
पाबंदियों में भी 
होशो-हवश में 
खुद एक नदी होकर भी 
जैसे जीती है प्याश में 
जिश्की हिंसी 
मुखर होती उदाश में 
लड़कियों को जो 
बंदिशों में रखते है 
उनके होते है 
हमेशा होश गम 

Saturday, 29 March 2014

सबको 
खासकर 
मेरे मित्र मंडली को 
ये लगता है 
कि मई 
अमृत -पान करके आयी हूँ 
जी नही, दुःख, विशद 
ऑशद और उम्र का बंधन 
मेरे साथ भी है 
चाहती हूँ 
अपने बेटे के लिए 
ज्यादा से ज्यादा जिउन 
ये भी चाहती हूँ 
जब जान जाये , मेरी 
तो, मई मंदिर कि 
सीढ़ियों पर रहु 
मुझे भी 
जीवन से थकावट होती है 
 किन्तु,
अपने बेटे के लिए 
जीना चाहती हु 
चाहती हु अपने बेटे से सबको 
परिचित करके जॉन 
ताकि, 
मेरे न रहने पर 
आप सबका साथ उसे रहे 
आपका हाथ 
उसके 
हाथ में रहे 

Friday, 28 March 2014


  जिस आँगन के फूलों 
पंखड़ियों 
पत्तों शाखों पेड़ 
आँगन में झरी पत्तियों 
धुप छाँव कि 
आंखमिचोलियों 
और सूरज चाँद के उजालों से 
मुझे प्यार होता था 
वो, कब हमारा था 
जो, आज हमारा है 
वो, भी कल किसी का होगा 

Thursday, 27 March 2014

वो बेटियां जो 
घर आँगन में 
फूलों कि तरह 
खिलती , खेलती 
मुस्कराती है 
वो, एक दिन 
उसी आँगन से दूर 
जाने किन गली कूचों में 
जाकर खो जाती है 
या बिरवे कि तरह 
दूसरे आँगन में 
रोप दी जाती है 
How did the shade shelter 
My village 
Where the child lives every dominate 
Green lotus trees 
Generally, the shade 
And was littered 
On the ground, was Gmkti 
Amramnjri 
It was blossomy 
Mahua and common 
And by evening 
It was felt that the moon today 
date is turned on 
Moon ever 
That, too, would like ripcord was strapped on 
Who, on his liver was Liota 
Or, Nimpr Grdwar, in porch 
Would feel 
A पहने जैसा , प्रिय 
Heart का राजदार 
No, अपना मिट सा 

Tuesday, 25 March 2014

Know 
You came in the house 
Sandal full of turmeric 
Sign of palms on the threshold क्या वो देहरी 
You भुला सकती हो 
तुम घर में होती हो 
तो, घर घर होता है 
तुम नही होती 
तो, एक मंजर होता है 
घर को हमेशा होती है 
आरजू जिसकी 
वो, सिर्फ तेरी बाँट जोहता है 
घर घर होता है 
जो, तुम होती हो, तो। 

Tumse O hasina kabhi mohabbat na maine - FARZ (1967)

Monday, 24 March 2014

बुआ जी के आँगन में २ बरस से भी कम उम्र में कैसे पहुंची 
ये कल बताउंगी 
बुआ जी के घर-आँगन कि मई अकेली राजकुमारी थी 
वैसा सुख फिर नही लौटा 

Sunday, 23 March 2014

मुम्बई में १५० रुपये का एक मटका मिला 
गर्मी में घड़े का शीतल जल से ही तृप्ति मिलती है 
  बुआजी  के घर में  था 

Saturday, 22 March 2014

होली का आनंद तो बुआजी के घर में था 
वैसा वक़त जो दोबारा अब नही मिलेगा 

Wednesday, 12 March 2014

kl;
kl
aye kl likhungi
koi mera blog ka pasword change krta 
dekhna , bahut pareshan hu

Friday, 7 March 2014

माँ गांव के घर में 
जब सुबह शाम 
झूले पर बैठकर 
गति थी 
गाती थी 
बेला अमृत गया 
बेखबर सो रह…।अ 
तू न जगा ,,,,,,