लड़कियां
हमेशा रहती है
पाबंदियों में भी
होशो-हवश में
खुद एक नदी होकर भी
जैसे जीती है प्याश में
जिश्की हिंसी
मुखर होती उदाश में
लड़कियों को जो
बंदिशों में रखते है
उनके होते है
हमेशा होश गम
हमेशा रहती है
पाबंदियों में भी
होशो-हवश में
खुद एक नदी होकर भी
जैसे जीती है प्याश में
जिश्की हिंसी
मुखर होती उदाश में
लड़कियों को जो
बंदिशों में रखते है
उनके होते है
हमेशा होश गम
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