वो बेटियां जो
घर आँगन में
फूलों कि तरह
खिलती , खेलती
मुस्कराती है
वो, एक दिन
उसी आँगन से दूर
जाने किन गली कूचों में
जाकर खो जाती है
या बिरवे कि तरह
दूसरे आँगन में
रोप दी जाती है
घर आँगन में
फूलों कि तरह
खिलती , खेलती
मुस्कराती है
वो, एक दिन
उसी आँगन से दूर
जाने किन गली कूचों में
जाकर खो जाती है
या बिरवे कि तरह
दूसरे आँगन में
रोप दी जाती है
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