Thursday, 27 March 2014

वो बेटियां जो 
घर आँगन में 
फूलों कि तरह 
खिलती , खेलती 
मुस्कराती है 
वो, एक दिन 
उसी आँगन से दूर 
जाने किन गली कूचों में 
जाकर खो जाती है 
या बिरवे कि तरह 
दूसरे आँगन में 
रोप दी जाती है 

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