Friday, 28 March 2014


  जिस आँगन के फूलों 
पंखड़ियों 
पत्तों शाखों पेड़ 
आँगन में झरी पत्तियों 
धुप छाँव कि 
आंखमिचोलियों 
और सूरज चाँद के उजालों से 
मुझे प्यार होता था 
वो, कब हमारा था 
जो, आज हमारा है 
वो, भी कल किसी का होगा 

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