जब काम हो करने को तब
किस ध्यान में लगे
माँ की याद आती है
जो, रातदिन ध्यान में रहती है
हमारा कर्तव्य ही हमारा ध्यान है जिन्हे
ध्यान लग्न हो बिना प्रयाश लग जाता है
इश्लीए जबरदस्ती कोशिश नही करे सहज शांति
अपने कर्तव्य से ही मिलती है
किस ध्यान में लगे
माँ की याद आती है
जो, रातदिन ध्यान में रहती है
हमारा कर्तव्य ही हमारा ध्यान है जिन्हे
ध्यान लग्न हो बिना प्रयाश लग जाता है
इश्लीए जबरदस्ती कोशिश नही करे सहज शांति
अपने कर्तव्य से ही मिलती है
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