माँ एक ही जगह
माँ एक ही जगह बैठी रहती है अक्सर कहती है
की गर्दन हिल रही है
माँ की अशंख्य तकलीफों के बीच भी माँ
माँ है
मेरी सीधी सदी माँ
जो, अक्सर मेरे पिता की बातें सहती रही
हूँ कहने की पितृ सत्तात्मक आदतों में
माँ चुपचाप सहकर
मानसिक रूप से टूट गयी
बीमर हो गयी
किन्तु उसकी भक्ति के स्वाभाव ने उसे
पत्ते पर राखी जल बिंदु सा
निर्लिप्त निर्विकार रखा
माँ तुम सच्ची साधिका हो ईश्वर को
प्रिय भी तुम्ही हो
माँ एक ही जगह बैठी रहती है अक्सर कहती है
की गर्दन हिल रही है
माँ की अशंख्य तकलीफों के बीच भी माँ
माँ है
मेरी सीधी सदी माँ
जो, अक्सर मेरे पिता की बातें सहती रही
हूँ कहने की पितृ सत्तात्मक आदतों में
माँ चुपचाप सहकर
मानसिक रूप से टूट गयी
बीमर हो गयी
किन्तु उसकी भक्ति के स्वाभाव ने उसे
पत्ते पर राखी जल बिंदु सा
निर्लिप्त निर्विकार रखा
माँ तुम सच्ची साधिका हो ईश्वर को
प्रिय भी तुम्ही हो
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