ये पु
ये ऊओ ये राममंदिर
मई एक एक दिन गिनती हूँ
कभी चैन से नही रहती
अब गांव जाउंगी
ये सोचके भी उत्सुक हूँ सब कुछ नया हो जैसे
माँ मिलना
माँ की ध्यानमग्न सूरत को याद करती
आयशा नन्ही बच्ची दो दिन नही थी
आज लौटी
मेरी गॉड में खेलती रही
और दिवालके स्विच को जलाने
उसे उप्र उठती मई
खुश होती रही
मई इतने दूर आकर
शायद आयशा की स्मृति को साथ ले जाउंगी आयशा
एक डेढ़ बरस की बच्ची
उसकी नानी दुबई जाएगी
और मई गांव
उसके नन्हे से दिमाग को नही समझेगा
की हम कहा चले गए
बच्चे तभी तो सब कुछ भूल जाते है
ये ऊओ ये राममंदिर
मई एक एक दिन गिनती हूँ
कभी चैन से नही रहती
अब गांव जाउंगी
ये सोचके भी उत्सुक हूँ सब कुछ नया हो जैसे
माँ मिलना
माँ की ध्यानमग्न सूरत को याद करती
आयशा नन्ही बच्ची दो दिन नही थी
आज लौटी
मेरी गॉड में खेलती रही
और दिवालके स्विच को जलाने
उसे उप्र उठती मई
खुश होती रही
मई इतने दूर आकर
शायद आयशा की स्मृति को साथ ले जाउंगी आयशा
एक डेढ़ बरस की बच्ची
उसकी नानी दुबई जाएगी
और मई गांव
उसके नन्हे से दिमाग को नही समझेगा
की हम कहा चले गए
बच्चे तभी तो सब कुछ भूल जाते है
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