गुरुपूर्णिमा कल थी
माँ कितनी पूजा पथ किया करती थी
माँ तब कितनी तेजस्वी लगती थी
माँ तुझे क्या हो गया
तुम हमेशा संतो का सत्कार कर आनंदित होती थी
माँ तुम्हारी तरह हम तो नही हो सके
माँ तुम्हारी इज्जत भी हम नही कर सके
माँ तुम्हारे ज्ञान को नही समझ सके
माँ तुम्हारी तरह परमात्मा को नही भज सके
माँ तुम इतनी ममतामयी रही
तुम्हारे ह्रदय में करुणा भरी रही
तुम ज्ञान के साथ प्रेम को भी मानती रही
हमेशा मेहमानों का स्वागत करती रही
तुमने हम सात बहन भाइयों का लालन-पालन ही नही किया
जबतक बना घर में गौ-पालन होता रहा
कृषि, खेती की संस्कृति को तुमने जीवित रखा
माँ तुम महान हो
तुमने घर में काम करने वालों को भी ममता से रखा
माँ तुम्हारे संग हमारी भक्ति की धारा चलती रही
माँ तुम शांति हो तुम्हारा मन सदैव वैराग्य से भरा रहा
ऐसी भक्ति-भाव रखने वाली
गुरुओं को मानने वाली माँ को साधुवाद , सत्कार, अभिनन्दन