गाँवो तक प्रगति नही होती
बहुओं को दासी ही समझते है
गांवों में उन्हें मार डालते है
पुलिस अपनी भूमिका नही निभाती
क्रूर अपराधी खुले घूमते है
बहुओं को दासी ही समझते है
गांवों में उन्हें मार डालते है
पुलिस अपनी भूमिका नही निभाती
क्रूर अपराधी खुले घूमते है
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