माँ घर के सहन में बैठी सबकी राह देखती है
सबको याद करती है
माँ के जमाने में हम झूले झूलते हुए रेडिओ पर गीत सुनते थे आज माँ हारी थकी, एक जगह बैठी सुनी आँखों से
सबकी राह देखती है माँ के पांवों में सूजन आ जाती है , कोई उससे नही बोलता
सबको याद करती है
माँ के जमाने में हम झूले झूलते हुए रेडिओ पर गीत सुनते थे आज माँ हारी थकी, एक जगह बैठी सुनी आँखों से
सबकी राह देखती है माँ के पांवों में सूजन आ जाती है , कोई उससे नही बोलता
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