वो गर्मियों के दिन थे
वो गर्मियों के दिन थे
बुआ जी पूरी दोपहरी सफर कर पहुंची थी
और घर पहुँचते ही
उन्होंने दूध की अलमारी से
दही निकालकर खाया था
वे जैसे थक सी गयी थी
बुआ जी अपना दुःख नही बता सकी किसी को
वो गर्मियों के दिन थे
बुआ जी पूरी दोपहरी सफर कर पहुंची थी
और घर पहुँचते ही
उन्होंने दूध की अलमारी से
दही निकालकर खाया था
वे जैसे थक सी गयी थी
बुआ जी अपना दुःख नही बता सकी किसी को
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