Friday, 11 July 2014

वो गर्मियों के दिन थे 
वो गर्मियों के दिन थे 
बुआ जी पूरी दोपहरी सफर कर  पहुंची थी 
और घर पहुँचते ही 
उन्होंने दूध की अलमारी से 
दही निकालकर खाया था 
वे जैसे थक सी गयी थी 
बुआ जी अपना दुःख नही बता सकी किसी को 

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