Saturday, 12 July 2014

 गुरुपूर्णिमा कल थी 
माँ कितनी पूजा पथ किया करती थी 
माँ तब कितनी तेजस्वी लगती थी 
माँ तुझे क्या हो गया 
तुम हमेशा संतो का सत्कार कर आनंदित होती थी 
माँ तुम्हारी तरह हम तो नही हो सके 
माँ तुम्हारी इज्जत भी हम नही कर सके 
माँ तुम्हारे ज्ञान को नही समझ सके 
माँ तुम्हारी तरह परमात्मा को नही भज सके 
माँ तुम इतनी ममतामयी रही 
तुम्हारे ह्रदय में करुणा भरी रही 
तुम ज्ञान के साथ प्रेम को भी मानती रही 
हमेशा मेहमानों का स्वागत करती रही 
तुमने हम सात बहन भाइयों का लालन-पालन ही नही किया 
जबतक बना घर में गौ-पालन होता रहा 
कृषि, खेती की संस्कृति को तुमने जीवित रखा 
माँ तुम महान हो 
तुमने घर में काम करने वालों को भी ममता से रखा 
माँ तुम्हारे संग हमारी भक्ति की धारा चलती रही 
माँ तुम शांति हो तुम्हारा मन सदैव वैराग्य से भरा रहा 
ऐसी भक्ति-भाव रखने वाली 
गुरुओं को मानने वाली माँ को साधुवाद , सत्कार, अभिनन्दन 

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