माँ
माँ कितने दोहे गाती है
एक दोहा याद आ रहा है
जो , माँ कहती थी
दया धर्म का मूल है , पाप मूल अभिमान
तुलसी दया ना छोड़िये , जबतक घट में प्राण
माँ कितने दोहे गाती है
एक दोहा याद आ रहा है
जो , माँ कहती थी
दया धर्म का मूल है , पाप मूल अभिमान
तुलसी दया ना छोड़िये , जबतक घट में प्राण
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