माँ
माँ सच्ची साधक है
एक बार मई गर्मी में गयी थी गांव
तो, आम की अमराई से
कोयल की कूक सुनाई दे रही थी
तब, माँ बोली थी
किसी कवि की मराठी में कविता थी
जिसका अनुवाद माँ ने बताया था
की, ये कोयल
तू क्यों इतना मीठा गाती है
तेरी मीठी बोली को सुनने वाले यंहा कौन है
मई माँ की बात का निहितार्थ समझ गयी थी
माँ ,तुमने कविता के माध्यम से अपनी बात राखी थी
माँ, सरस्वती तुम्हारे जिन्हा में वास करती है
तुम कितना जानती हो, जो
हमे कुछ भी याद नही
जो, तुम इतना सुंदर कविता कहती हो
माँ सच्ची साधक है
एक बार मई गर्मी में गयी थी गांव
तो, आम की अमराई से
कोयल की कूक सुनाई दे रही थी
तब, माँ बोली थी
किसी कवि की मराठी में कविता थी
जिसका अनुवाद माँ ने बताया था
की, ये कोयल
तू क्यों इतना मीठा गाती है
तेरी मीठी बोली को सुनने वाले यंहा कौन है
मई माँ की बात का निहितार्थ समझ गयी थी
माँ ,तुमने कविता के माध्यम से अपनी बात राखी थी
माँ, सरस्वती तुम्हारे जिन्हा में वास करती है
तुम कितना जानती हो, जो
हमे कुछ भी याद नही
जो, तुम इतना सुंदर कविता कहती हो
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