Sunday, 14 December 2014

माँ
माँ सच्ची साधक है 
एक बार मई गर्मी में गयी थी गांव 
तो, आम की अमराई से 
कोयल की कूक सुनाई दे रही थी 
तब, माँ बोली थी 
किसी कवि की मराठी में कविता थी 
जिसका अनुवाद माँ ने बताया था 
की, ये कोयल 
तू क्यों इतना मीठा गाती है 
तेरी मीठी बोली को सुनने वाले यंहा कौन है 
मई माँ की बात का निहितार्थ समझ गयी थी 
माँ ,तुमने कविता के माध्यम से अपनी बात राखी थी 
माँ, सरस्वती तुम्हारे जिन्हा में वास करती है 
तुम कितना जानती हो, जो 
हमे कुछ भी याद नही 
जो, तुम इतना सुंदर कविता कहती हो 

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