Saturday, 27 December 2014

माँ
माँ जिसने जन्म दिया 
कितनी मुश्किल भरी जिंदगी थी उसकी 
 सुबह से आज उसे चक्र भी नही बात कर सकी हूँ 
अब, घर जाते ही, माँ से फोन पर बात करूंगी 
मेरा जन्म जब हुआ 
माँ आज भी बताती है की १५ दिन बाद तिल-संक्रात आई थी 
माँ को बुआ जी तब मेथी के कड़वे लड्डू खिलाती थी 
नन्द के घर कोई नखरे नही चलते थे 
जचकी के १५ दिन बाद सब काम करने होते थे 
माँ ने हम ७ बहन-भाइयों को जन्म दिया 
वो, कितने कठिनाई से दूसरों के घर हमे देखती रही होगी 
बड़े घरों में बड़े काम होते है 
माँ को भी पल भर अपने लिए नही मिलता था मुझे 
तब कौन देखता 
बुआ जी मुझे अपने साथ ले गयी थी 
तब, मई डेढ़ बरस की भी नही थी 
 गए है , दिन बिट गए है 
तो, चलूँ, 
माँ से बाटे , ये……। 
मई भी दिन भर से आज थक गयी हूँ 

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