Friday, 19 February 2016

माँ से ल बात हुई , और सब कुछ द्रवित करने वाला था
भाई को भी परेशानी, भाभी के भी सपने चुरचूर कुछ समझ नही आ रहा
माँ का पांव नही उठता और वो, रोटी और कराहती रहती  है
पांव नही उठता , वंही व्हील चेयर पर बाथरूम में भी उसे तकलीफ है पांव जो नही उठता
ये घिसटती तड़पती जिंदगी
पहले की उत्साही माँ याद आती है जो दौड़कर घरके काम करती थी
अब वो दूसरों के वष में है, परवश है
क्या करेगी, यदि जीना नही चाहती तब भी जीना है मई लगातार ईश्वर का स्मरण करती हूँ
कई भगवन उसे या तो, ठीक करो, या उठा लो
भाई-भाभी भी इस तकलीफ से नींद नही ले पाते
जो , भाई ड्यूटी में है, वो विवश हो कहता है
माँ अं थक गयी है .......... शरीर भी जब बोझ बन जाता है 

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