आज अचानक गांव चली गयी
बचपन का गांव
जैसे पीपल की छाँव
कुछ पुराने पथराए चेहरों पर
फूटी एक हंसी की किरण
भींग गया मन
जैसे हो, झरने की फुहार
ऐसा था
रसभीना
मेरे अपनों का प्यार
कुछ पल को सब, नतमस्तक थे
जैसे मई अपने पुराने
ऐश्वर्या को पा रही थी
किन्तु वो विगत था
आज मेरे पास संघर्ष है
आगत के लिए
लगी रहहति हूँ
जी जान से
फिर भी
पाकर उस पुराने स्नेह मान को
मन, भर गया था
ओजस्वी अभिमान से
बचपन का गांव
जैसे पीपल की छाँव
कुछ पुराने पथराए चेहरों पर
फूटी एक हंसी की किरण
भींग गया मन
जैसे हो, झरने की फुहार
ऐसा था
रसभीना
मेरे अपनों का प्यार
कुछ पल को सब, नतमस्तक थे
जैसे मई अपने पुराने
ऐश्वर्या को पा रही थी
किन्तु वो विगत था
आज मेरे पास संघर्ष है
आगत के लिए
लगी रहहति हूँ
जी जान से
फिर भी
पाकर उस पुराने स्नेह मान को
मन, भर गया था
ओजस्वी अभिमान से
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