aangan
Wednesday, 13 January 2016
aangan: जब कपड़ो के ढेर देखती हूँ तो, गांव की यात्रा में स...
aangan: जब कपड़ो के ढेर देखती हूँ तो, गांव की यात्रा में स...
: जब कपड़ो के ढेर देखती हूँ तो, गांव की यात्रा में सहित में ठिठुरते दिन में मैंने उसे बिना ब्लौस देखि थी, मात्र चिथड़ों में देह लिपटे हुए, बेच...
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