Thursday, 21 January 2016

माएं इश्लीए होती है , कि वे दुआ करती है, मन्नत मांगती है कि उसके बच्चों का जीवन सही पटरी पर चले , माँ से सबको शिकायत हो जाती है, जब वो वृद्ध हो जाती है , पर माँ को अपने बच्चों से कभी कोई शिकायत नही होती , वो सब जगह जाकर माथा टेक आती है , हाथ उठकर, उपर वाले  से प्रार्थना करती है 
माँ की आवाज थरथराती है देह भी जाड़े से अकड़ी जाती है, बहुत ठण्ड लगती है ,कहती है, कभी नींद न आने की शिकायत। ..... जो भी हो, माँ के होने से लगता है, हम भी कुछ है, उसकी आँखों में अपने बच्चों को देख ऐसी चमक उभरती है, और वो, हमारे लिए जीवित रहती है , हम माँ को फिर भी कभी कोई उपहार नही देते। 

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