Sunday, 2 February 2014

जबसे धरा पर 
जब धरती पर 
जब धरती पर 
सूर्य कि किरणे सीधी पढ़ने लगती है 
प्रकृति तब अपना रंग बदलने लगती है 
मन कुछ उदाश सा रहता है 
कोई दिलके पास रहता है 
दोपहर को कोई अहसास रहता है 
सूनेपन कि आहात से 
पेड़ो कि सुगबुगाहट से 
घर के सहन में तब 
गूंजती है, उदास गजल कि आवाजे 
और क्या लिखूं, बताओ न 
कुछ हिंदी , मुझे भी सिखाओ न 

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