जबसे धरा पर
जब धरती पर
जब धरती पर
सूर्य कि किरणे सीधी पढ़ने लगती है
प्रकृति तब अपना रंग बदलने लगती है
मन कुछ उदाश सा रहता है
कोई दिलके पास रहता है
दोपहर को कोई अहसास रहता है
सूनेपन कि आहात से
पेड़ो कि सुगबुगाहट से
घर के सहन में तब
गूंजती है, उदास गजल कि आवाजे
और क्या लिखूं, बताओ न
कुछ हिंदी , मुझे भी सिखाओ न
जब धरती पर
जब धरती पर
सूर्य कि किरणे सीधी पढ़ने लगती है
प्रकृति तब अपना रंग बदलने लगती है
मन कुछ उदाश सा रहता है
कोई दिलके पास रहता है
दोपहर को कोई अहसास रहता है
सूनेपन कि आहात से
पेड़ो कि सुगबुगाहट से
घर के सहन में तब
गूंजती है, उदास गजल कि आवाजे
और क्या लिखूं, बताओ न
कुछ हिंदी , मुझे भी सिखाओ न
JINU, DEKH TO, ye kavita kaisi h
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