दिवाली
दिवाली के वक़्त में
दिवाली में सभी क्या क्या नही करते
मेरी छोटी बहन है
बहुत प्यारी है घर भी बहुत बड़ा है, उसका
किन्तु, दिवाली में उदाश है
क्योंकि , दिवाली में उसे घरसे नई साड़ी लेने की इजाजत नही है
वो, बहुत गलत महसूस करती है
कहती है इतना सब-कुछ है
किन्तु, मेरे लिए कुछ नही है
सब कुछ होकर भी
जो, आदमी अपनी पत्नी को एक साड़ी लेकर न दे सके
और दिवाली में साड़ी को तरसाये
क्या करे,
वैसे भी हम सब हमेशा उसे कुछ लेकर देते रहे
पर अब वो नही मांगती
मई सोचती हूँ की
वो, भी कोई ट्यूशन कर लेती तो
अपने लिए कुछ ले सकती
दूसरों के घरेलू मामलों में कुछ बोलना
उचित भी तो नही। ....
घर में बहुत सारी बातें होती है
किन्तु हम अपने घर के प्रति हमेशा
समर्पित ही रहेंगे
क्योंकि, घर हमारा आश्रय होता है हमारा वजूद भी हमारा
घर परिवार ही तो है………
दिवाली के वक़्त में
दिवाली में सभी क्या क्या नही करते
मेरी छोटी बहन है
बहुत प्यारी है घर भी बहुत बड़ा है, उसका
किन्तु, दिवाली में उदाश है
क्योंकि , दिवाली में उसे घरसे नई साड़ी लेने की इजाजत नही है
वो, बहुत गलत महसूस करती है
कहती है इतना सब-कुछ है
किन्तु, मेरे लिए कुछ नही है
सब कुछ होकर भी
जो, आदमी अपनी पत्नी को एक साड़ी लेकर न दे सके
और दिवाली में साड़ी को तरसाये
क्या करे,
वैसे भी हम सब हमेशा उसे कुछ लेकर देते रहे
पर अब वो नही मांगती
मई सोचती हूँ की
वो, भी कोई ट्यूशन कर लेती तो
अपने लिए कुछ ले सकती
दूसरों के घरेलू मामलों में कुछ बोलना
उचित भी तो नही। ....
घर में बहुत सारी बातें होती है
किन्तु हम अपने घर के प्रति हमेशा
समर्पित ही रहेंगे
क्योंकि, घर हमारा आश्रय होता है हमारा वजूद भी हमारा
घर परिवार ही तो है………
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