Saturday, 25 October 2014

बुआ जी के घर वो मौसम ऐसा ही था बुआ जी बहुत याद आती है उनके घर एकांत था किन्तु 
हम सब मोहल्ले के साथ थे 
बुआ जी के बड़े से घर की यादें ठहरी हुई है 
कितनी बातेहै, जो बहुत याद आती है 
उनकी, वो आरती, जो सब चले जाते थे तब बुआ जी कितनी अन्यमनस्क 
होकर घर के द्वार लगती थी
लिख नही पा रही हु बहुत ही गहरी स्मृति है वो, ठहरे हुए दिन वो, घर का सूनापन 
लेकिन कभी लगा नही की हम अकेले है 

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