बुआ जी के घर वो मौसम ऐसा ही था बुआ जी बहुत याद आती है उनके घर एकांत था किन्तु
हम सब मोहल्ले के साथ थे
बुआ जी के बड़े से घर की यादें ठहरी हुई है
कितनी बातेहै, जो बहुत याद आती है
उनकी, वो आरती, जो सब चले जाते थे तब बुआ जी कितनी अन्यमनस्क
होकर घर के द्वार लगती थी
लिख नही पा रही हु बहुत ही गहरी स्मृति है वो, ठहरे हुए दिन वो, घर का सूनापन
लेकिन कभी लगा नही की हम अकेले है
हम सब मोहल्ले के साथ थे
बुआ जी के बड़े से घर की यादें ठहरी हुई है
कितनी बातेहै, जो बहुत याद आती है
उनकी, वो आरती, जो सब चले जाते थे तब बुआ जी कितनी अन्यमनस्क
होकर घर के द्वार लगती थी
लिख नही पा रही हु बहुत ही गहरी स्मृति है वो, ठहरे हुए दिन वो, घर का सूनापन
लेकिन कभी लगा नही की हम अकेले है
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