Monday, 20 October 2014

जो
जो हमारे अपने थे 
वो, गांव से थे 
नही पता वो सब कहा पीछे छूट गए 
जो, खेती करते थे 
खेती में ही रमे रहते थे 
जीवन इतना कर्कश नही था 
जैसा आज भागदौड़ व् स्वार्थ से हो गया है 
हमने विकाश की अंधी दौड़ में 
उन लोगों को खो दिया है 
जो, बहुत प्यारे थे 
जो खेती करते थे गौ पालते थे 
ज्यादा शान नही थी 
फिर सिनेमा ने जिंदगी में 
ऐसे फैशन लाया 
जो, हमारे पैसे खाता है 
हम बहुत ज्यादा कमाते है 
किन्तु अकेले रहते है 
प्रायः टीवी के सहारे 
जो जीवन पहले था 
बहुत अपनेपन लिए था 
जो, लोग हमसे बिछड़कर बहुत दूर चले गए 
वो, हमे बहुत चाहते थे 
बहुत फैशन नही करते थे 
किन्तु, बड़े सुंदर थे 
जाने कहा चले गए 
वो, सब, 
जिनसे हमारे त्यौहार व् व्यहार मधुर थे 
आज हमसे सभी दूर है 
हम अकेले त्यौहार मनाते है 
अपने विगत को याद करते हुए 

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