आँगन
आँगन बनारस की बयार से बहुत आगे है
आज इसकी ५०५० बार २०६ पोस्ट पढ़ी जा चुकी है
जबकि , बनारस की बयार की १०२७ पोस्ट
५१६९ बार पढ़ी गयी है
आँगन को मेरी माता जी व् बुआ जी का आशीर्वाद मिला है उनका
अकिंचन स्नेह है
मई बहुत याद करती हूँ की
बुआ जी के घर जैसी दिवाली थी वो, आज तक याद आती है
तब, जो खेती की जाती थी गौएँ पाली जाती थी तब, घरों में सब कुछ
भरा भरा सा था
आज जो किलो के भाव से मिलता है
तो, पैसे गिनते पसीने छुट्टे है
तब, कुढ़ो व् पायली से
बेहिसाब गिना जाता था आज वे शब्द हंसी का सबब बन गए
और हम महंगाई से बदहाल हो गए हमारी ये समृद्धि तो बीएस नाम की है
वो, तो वास्तविक थी
आँगन बनारस की बयार से बहुत आगे है
आज इसकी ५०५० बार २०६ पोस्ट पढ़ी जा चुकी है
जबकि , बनारस की बयार की १०२७ पोस्ट
५१६९ बार पढ़ी गयी है
आँगन को मेरी माता जी व् बुआ जी का आशीर्वाद मिला है उनका
अकिंचन स्नेह है
मई बहुत याद करती हूँ की
बुआ जी के घर जैसी दिवाली थी वो, आज तक याद आती है
तब, जो खेती की जाती थी गौएँ पाली जाती थी तब, घरों में सब कुछ
भरा भरा सा था
आज जो किलो के भाव से मिलता है
तो, पैसे गिनते पसीने छुट्टे है
तब, कुढ़ो व् पायली से
बेहिसाब गिना जाता था आज वे शब्द हंसी का सबब बन गए
और हम महंगाई से बदहाल हो गए हमारी ये समृद्धि तो बीएस नाम की है
वो, तो वास्तविक थी
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