Sunday, 26 October 2014

वक़्त
वक़्त नही मिलता है 
क्योंकि, मेरे पास लैपटॉप नही है 
खरीदने की इजाजत नही है 
लिखना सिखने भी वक़्त होना 
१ ऑवर में मई सिर्फ देख सकती हूँ 
ज्यादा कुछ नही होता 
आप सब मेरी विवशता समझे की मई क्यों इतना 
ठहरा लेखन करती हूँ 
बहुत से फ़र्ज़ है 
जो निभाने है 
हिंदुस्तान का लेखक संकोची ज्यादा है 
उसे प्रोफेशनल होना होगा 
मेरी किताब, पारिजात जल्द आ रही है 
आप , सॉरी 
मेरी दूसरी किताब भी उसके बाद लाइन में है 
उसके बाद मेरे नावेल, लागि नहीं। . छूटे रामा
पर काम होगा 
इन सबमे वक़्त लगेगा 
चूँकि पहले से जो लिखा है 
वो, नही छाप साकी हूँ 
तो, रुका सा लगता है 
अबतो, सोनू का घर बसना पहली प्राथमिकता है फिरसे मुंबई जाने की सोचने लगती हु 
वक़्त फिर हाथ से निकल रहा है 

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